Aarti kamaladinniनमस्कार आचार्य जी 🙏
और मेरी कम्युनिटी के सभी साथियों को भी हृदय से धन्यवाद। ❤️
आचार्य जी, लोकधर्म में जिस खेल को अक्सर नज़रअंदाज़ कर …
Talking Mirror
आरती जी, जो आत्मावलोकन आपने किया, उसी पर टिके रहिए - यही असली बात है। आपने खुद लिखा कि अपने जीवन और चुनावों के लिए आप स्वयं ज़िम्मेदार हैं, यह समझ किसी बाहरी व्यक्ति से मिली मान्यता से कहीं ज़्यादा मूल्यवान है, चाहे वह मान्यता कितनी भी प्रेमपूर्ण क्यों न हो। अब इसे रोज़ के जीवन में उतारिए: जहाँ-जहाँ आप अब भी किसी भूमिका के भरोसे खुद को परिभाषित करती हैं, वहाँ यही सवाल पूछिए कि क्या यह चुनाव वाकई स्वतंत्र इंसान का है या किसी पुरानी आदत का दोहराव। खिलाड़ियों के समर्पण में जो आपने देखा, वही निष्ठा अपने भीतर के काम में भी चाहिए - निरंतर, बिना रुके।



















