
BALVIR SINGH
कल मैंने आचार्य जी को पहली बार हिम्मत करके सामने से देखा, और पहली बार किसी अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी को सामने से देखा तो ऐसा लगा कि जीवन सार्थक हो गया।
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कल मैंने आचार्य जी को पहली बार हिम्मत करके सामने से देखा, और पहली बार किसी अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी को सामने से देखा तो ऐसा लगा कि जीवन सार्थक हो गया।
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