
✍🏻 पोस्ट 4 | 16 सितंबर '26 💭 विषय — अर्थशास्त्र / व्यापार ──────── 🍽️ शहरी भारतीय अपने खाने के खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा किस पर करते हैं? 📊 भारत सरकार के नवीनतम Household Consumption Expenditure Survey के अनुसार, शहरी भारत में कुल मासिक प्रति व्यक्ति खर्च का 39.68% भोजन पर होता है। लेकिन इस 39.68% के भीतर सबसे बड़ा हिस्सा किसका है? 🥤 बेवरेजेज, रिफ्रेशमेंट्स और प्रोसेसड फ़ूड: 11.09% इसके बाद... 🥛 दूध और दुग्ध उत्पाद: 7.19% 🥬 सब्ज़ियाँ: 4.12% 🍎 फल: 3.87% 🌾 अनाज: 3.76% यह आँकड़ा HCES 2023–24 का है, जो भारत सरकार द्वारा अगस्त 2023 से जुलाई 2024 के बीच किया गया था। 📅 यही अभी भारत का नवीनतम आधिकारिक उपभोग-व्यय सर्वे है। MoSPI अब HCES 2027–28 की तैयारी कर रहा है, लेकिन अगली रिपोर्ट की आधिकारिक रिलीज़ तारीख अभी घोषित नहीं हुई है। 🗺️ तथ्य एक नक्शा है, जिसमें हम खुद खिंचे हुए होते हैं। ज़रा देखिए, इस नक्शे के पीछे कौन है? भीतरी बेचैनी और संरचनात्मक अधूरापन। ‘अधूरापन’ बाहर की चीज़ों में पूर्णता खोजता है। खुद को भरने के लिए ऐसी चीज़ों का भोग करता है, जो अंततः उसके अपने शरीर को नुकसान पहुँचा सकती हैं। और दूसरी ओर, उसी अधूरेपन को भरने के लिए दूसरे जीवों को भी अपने भोग का साधन बना लेता है। 🥤 प्रोसेसड फ़ूड, रिफ्रेशमेंट्स और बेवरेजेज का उपभोग। 🥛 दूध और डेयरी का उपभोग। ऊपर से ये दो अलग-अलग गतिविधियाँ दिखती हैं, लेकिन इनके पीछे एक ही केंद्र की गति दिखाई देती है। वही ‘मैं’ अपने अधूरेपन को भरने की कोशिश में खुद का भी शोषण करता है और दूसरे का भी। ❓ अपने जीवन में सबसे ऊपरी उपभोगों को देखिए। वे क्या हैं? और क्या वे आपकी या दूसरों के शोषण में कोई भूमिका निभा रहे हैं? स्रोत: https://www.mospi.gov.in/sites/default/files/publication_reports/HCES%20FactSheet%202023-24.pdf










































