
मैने भी अपने आप को पूरा करने के लिए किसी बाहरी खुशी के लिए अर्थात अपने अहंकार को पूरा करने के लिए हमेशा दूसरों से उम्मीद रखती थी। मैने अभी खाने के लिए दूसरे जीव को नहीं मारती हु, दाल चावल हरि सब्जियां ही खाती हु। लेकिन कुछ समय टेस्ट के लिए ज्यादा ताला भूना खा लेने से खुद को नुकसान पहुंचा लेती हु। जिससे अपने स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। मनुष्य अपने आवश्कता की पूर्ति करने लिए अर्थात् अपने अहंकार के लिए दूसरे जीव को नुकसान पहुंचाती है। जिससे खुद को तो उसका बुरा प्रभाव पड़ता है साथ में दूसरे जीव को नष्ट करता हैं और प्रकृति को भी समाप्त कर देता है। इसका परिणाम खुद पर पड़ रहा है । फिर भी नहीं देख पा रहा है। इससे दोनों को नुकसान पहुंचाता है।


















