
✍🏻 पोस्ट 19 | 24 अक्टूबर ’26 💭 विषय — मानव उत्कृष्टता ──────────── 🇮🇳 28 साल की उम्र में एक महिला ने कैसे संभाली फ़ौज की कमान? 📍 साल 1943, सिंगापुर। 28 साल की एक भारतीय महिला ने ऐसा फ़ैसला लिया, जिसने उनकी ज़िंदगी की दिशा बदल दी। उनका नाम था लक्ष्मी सहगल। 👩🏻⚕️ 24 अक्टूबर 1914 को जन्मीं लक्ष्मी ने 1938 में डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी की। 1940 में सिंगापुर जाकर गरीब भारतीय मज़दूरों के लिए क्लिनिक खोला। ⚔️ लेकिन डॉक्टर से फ़ौज की कमांडर कैसे बनीं? 1943 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आज़ाद हिंद फ़ौज में महिलाओं की 'रानी झाँसी रेजिमेंट' बनाई। लक्ष्मी ने इसकी कमान संभाली। इस रेजिमेंट में लगभग 1200 महिलाओं को सैनिक प्रशिक्षण दिया गया। वे आज़ाद हिंद सरकार में महिला मामलों की मंत्री भी बनीं। बाद में अंग्रेज़ों ने उन्हें हिरासत में ले लिया। 🏥 आज़ादी मिली, लेकिन काम नहीं रुका! 1947 में कानपुर बसने के बाद उन्होंने बँटवारे से आए शरणार्थियों और गरीबों का इलाज शुरू किया। 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के बाद भी वे चिकित्सा सहायता देने पहुँचीं। 92 साल की उम्र में भी वे मरीज देखती थीं। 23 जुलाई 2012 को, 97 वर्ष की उम्र में उनका निधन हुआ। 💡 लक्ष्मी सहगल ने दिखाया कि लड़की का जीवन केवल घर और रिश्तों तक सीमित नहीं है। उनके जीवन का केंद्र अपनी सुविधा या समाज की स्वीकृति पाना नहीं, बल्कि शोषण के विरुद्ध खड़ा होना था। लड़की को चुनाव का अधिकार मिलना ज़रूरी है, लेकिन उतना ही ज़रूरी है कि वह खुद से पूछे, मेरे फ़ैसले डर, सुविधा और दूसरों की उम्मीदों से आ रहे हैं या अपनी समझ से? ❓ हम लड़कियों को अपने फ़ैसले खुद लेने से सबसे ज़्यादा क्या रोकता है? A. परिवार की रोक-टोक B. गलत फ़ैसले लेने का डर C. दूसरों की स्वीकृति की चाह D. आर्थिक निर्भरता E. कुछ और? अपना अनुभव लिखें। 🔗 स्रोत: https://biblioasia.nlb.gov.sg/all-sections/vol-14-issue-1-apr-jun-2018-warrior-women-rani-jhansi-regiment/
















































