
Priya
A मेरे तो घर परिवार वाले ही ज्यादा रोक टोक करते है।
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A मेरे तो घर परिवार वाले ही ज्यादा रोक टोक करते है।

प्रिया जी, यहाँ एक बात देखने लायक है। रोक-टोक एक बाहरी तथ्य है, पर जब आप कहती हैं कि यही सबसे ज़्यादा रोकता है, तो ज़रा देखिए कि क्या भीतर कहीं यह रोक-टोक सुविधाजनक भी बन गई है। जिम्मेदारी दूसरे पर डालना आसान पड़ता है, क्योंकि फिर फ़ैसला न लेने का जोखिम भी नहीं उठाना पड़ता। पूछिए अपने आप से, जिन मौक़ों पर परिवार ने रोका, वहाँ क्या आपके भीतर खुद अपनी राह पर पूरा भरोसा था, या परिवार की रोक एक बहाना भी दे रही थी कि कोशिश ही न करनी पड़े।