सुख, दुःख और लालच || आचार्य प्रशांत, धम्मपद पर (2013)
आचार्य प्रशांत
भगवान निर्दयी से क्यों लगते हैं? || आचार्य प्रशांत, संत बुल्लेशाह पर (2017)
आत्मविचार और आत्मज्ञान || आचार्य प्रशांत, श्री योगवाशिष्ठ पर (2017)
क्रोध और ईर्ष्या से कैसे बचें? || आचार्य प्रशांत (2017)
कैसे चलें तन और मन? || आचार्य प्रशांत (2014)
Love, marriage, and happiness || Acharya Prashant (2014)
Acharya Prashant
कौन परम को पाता है? || आचार्य प्रशांत, मुण्डकोपनिषद् पर (2015)
जब मन रौशन हुआ तब दिवाली जानो || आचार्य प्रशांत (2016)
The Total is neither masculine nor feminine, hence the search and summit of both || Acharya Prashant
ना वो बढ़ता है, ना वो घटता है || आचार्य प्रशांत, गुरु नानक पर (2017)
Clarity, practicality, goals, body and mind || Acharya Prashant, with youth (2014)
जैसा मन, वैसा जीवन || आचार्य प्रशांत (2014)
भगवद्गीता का अनूठापन || आचार्य प्रशांत, श्रीकृष्ण पर (2013)
कैरियर का चुनाव कैसे करें? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)
Physical nature, habits, and forgetting the past || Acharya Prashant, with youth (2014)
शादियों में व्याप्त झूठ का माहौल || आचार्य प्रशांत (2013)
माँस का त्याग कैसे करें? || आचार्य प्रशांत, श्री योगवाशिष्ठ पर (2017)
गुरु से प्रेम, सत्य से प्रेम || आचार्य प्रशांत, गुरु कबीर पर (2013)
जीवन में मुक्ति कैसे मिले? || आचार्य प्रशांत (2013)
The way to change life || Acharya Prashant, on Jiddu Krishnamurti (2013)
मौत का डर क्यों सताता है? || आचार्य प्रशांत (2017)
व्यक्तित्व क्या, विश्वास क्या? || आचार्य प्रशांत, युवाओ के संग (2013)
शांति और आजीविका एक साथ कैसे चलें? || आचार्य प्रशांत (2015)
मुक्ति का वास्तविक अर्थ || आचार्य प्रशांत, अष्टावक्र गीता पर (2013)
मन बंधन में कब है? || आचार्य प्रशांत, अष्टावक्र गीता पर (2013)
Respect that precludes closeness is not Love, and not even Respect || Acharya Prashant (2015)
Spirituality is science turned inwards - it looks at both the subject and object || Acharya Prashant
डर आता है क्योंकि तुम उसे बुलाते हो || आचार्य प्रशांत (2014)
पीड़ा बनती है मुक्ति का आधार || आचार्य प्रशांत (2013)
बुरी संगत कैसे पहचानें? कैसे बचें? || आचार्य प्रशांत (2017)