जीव के लिए ही मृत्यु है || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
आचार्य प्रशांत
मौत के डर को कैसे खत्म करूँ? || आचार्य प्रशांत (2015)
जीना हो तो मौत को चुनना होगा || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
जो अपनी सच्चाई बचाता है,उसे स्वयं सच्चाई बचाती है || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
सत्य के लिए साहस नहीं सहजता चाहिए || आचार्य प्रशांत (2015)
जीवन में कुछ भी गंभीर नहीं || आचार्य प्रशांत (2014)
डर क्या होता है? || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2015)
जो भयभीत है उसके लिए भय ही विधि है || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2015)
मन तुम्हारा पूरा भय से युक्त,कभी मत कहना तुम भय से मुक्त || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
सच है, न मौत है, न डर है || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
दमित जीवन ही उत्तेजना मांगता है || आचार्य प्रशांत (2015)
आशा बचाती है अतीत के कचरे को || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
हमारे रिश्तों की वास्तविकता || आचार्य प्रशांत, कबीर पर (2015)
करीब आने का क्या अर्थ है? || आचार्य प्रशांत (2017)
अपनी आदतों के सिवा मैं कुछ और नहीं || आचार्य प्रशांत (2013)
क्या है जीवन, क्या है मृत्यु? || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2015)
मैं इकट्ठा क्यों करता हूँ? || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2015)
संस्कारग्रस्त मन भविष्य की ओर भागेगा ही || आचार्य प्रशांत ( 2015)
तुम्हारी और संसार की प्रकृति है अनित्यता || आचार्य प्रशांत (2013)
मौत के डर से सहमा हुआ है हर ख्याल || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर