
यह किताब मेरे लिए एक आईना साबित हुई। आचार्य प्रशांत जी ने बड़ी सहजता से यह समझाया कि जवानी सिर्फ मौज-मस्ती या भ्रमों में खो जाने का समय नहीं है, बल्कि यह आत्मचिंतन और सही दिशा में ऊर्जा लगाने का सबसे अच्छा मौका है। किताब ने मुझे मेरे भ्रम, इच्छाओं और समाज से मिले झूठे आदर्शों पर सवाल करना सिखाया। अगर आप अपनी जवानी को सही मायने में जीना चाहते हैं, तो यह किताब जरूर पढ़ें।
We are humans and we should be grateful for this life as a human and should live a life with purpose and meaning. but what we are actual doing ? we are totally unaware of our life and ourselves ...just living without actually living....Conclusion is SELF AWARENESS IS A MUST IF WE WANT TO LIVE THIS BEAUTIFUL GIFT - "LIFE".

इस किताब को पढ कर मैंने सीखा गाने और फ़िल्में के द्वारा एक दृष्टि हमें परोसी जाती है.....मतलब जब हम कहते है कि कोई फिल्म हमें अच्छी लगती है, तो हम उस फिल्म के दिखाए गए नज़रिए के समर्थक हो जाते है!!!! कैसे वो नज़रिया हमारे कपड़े पसंद करने से लेकर सामाजिक मुद्दों पर हमारी सोच को आकार देता है.......ये मैंने सीखा। किस प्रकार के मनोरंजन के आप शौकीन है.....सवाल ज़रूरी है ।