
इस किताब को पढ कर मैंने सीखा गाने और फ़िल्में के द्वारा एक दृष्टि हमें परोसी जाती है.....मतलब जब हम कहते है कि कोई फिल्म हमें अच्छी लगती है, तो हम उस फिल्म के दिखाए गए नज़रिए के समर्थक हो जाते है!!!! कैसे वो नज़रिया हमारे कपड़े पसंद करने से लेकर सामाजिक मुद्दों पर हमारी सोच को आकार देता है.......ये मैंने सीखा। किस प्रकार के मनोरंजन के आप शौकीन है.....सवाल ज़रूरी है ।