
छंद 13-23

आचार्यजी ने कठिन सूत्रों को बहुत सरल तरीके से और बहुत ही स्पष्टता से समझाया है। हर सूत्र किसी न किसी मान्यता पर वार करता है,और विद्रोह पैदा करता है। आचार्यजी उन मान्यताओं को हमारे जीवन से जोड़कर,स्पष्ट तरीके से हमे उनसे सामना करवाते हैं और जीवन के विविध पहलुओं में हम कितनी सूक्ष्मता से उनको सच मानकर बैठे हैं,इसका पर्दाफाश करते हैं।

शून्यता सप्तति - भाग 2” पढ़कर मुझे लगा कि यह पहले भाग की तुलना में और अधिक गहराई में जाकर शून्यता के दर्शन को समझाती है। इस किताब में आचार्य नागार्जुन के विचारों को बहुत ही सहज तरीके से आगे बढ़ाया गया है, जिससे कठिन विषय भी धीरे-धीरे स्पष्ट होने लगते हैं। मुझे खास तौर पर यह बात बहुत प्रभावशाली लगी कि यह किताब हमें अपनी ही मान्यताओं और सोच को परखने के लिए प्रेरित करती है। हम अक्सर जो मानते हैं, उसी...