
शून्यता सप्तति - भाग 2” पढ़कर मुझे लगा कि यह पहले भाग की तुलना में और अधिक गहराई में जाकर शून्यता के दर्शन को समझाती है। इस किताब में आचार्य नागार्जुन के विचारों को बहुत ही सहज तरीके से आगे बढ़ाया गया है, जिससे कठिन विषय भी धीरे-धीरे स्पष्ट होने लगते हैं। मुझे खास तौर पर यह बात बहुत प्रभावशाली लगी कि यह किताब हमें अपनी ही मान्यताओं और सोच को परखने के लिए प्रेरित करती है। हम अक्सर जो मानते हैं, उसी...