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Paperback Details
HindiLanguage
188Print Length
Description
लोहा कीचड़ में पड़ा रह जाए तो लोहा नहीं बचता, ज़ंग हो जाता है, और कहते हैं कि उसी लोहे को अगर पारस की दोस्ती मिल जाए तो भी वो लोहा नहीं बचता, सोना हो जाता है। हमारे जीवन की क्या गुणवत्ता है, वो अगर किसी एक चीज़ से निर्धारित होती है, तो वो है संगति।
तुम्हारे जीवन की गति को, दिशा को, पूर्णता को और सुन्दरता को अगर कुछ निर्धारित करेगा, तो वो ये है कि तुम किनके साथ जुड़े रहे, किन लोगों को तुमने अपनी ज़िन्दगी में जगह दी। सबकुछ इसी से बदल जाना है।
आत्मा असंग है, पर हम किसी की संगति पर आश्रित होते हैं, मन को कोई विषय चाहिए और शरीर को वस्तु चाहिए। हमें संगति चाहिए क्योंकि हम धरती के बाशिन्दे हैं।
तो हमें कुसंगति और सुसंगति का विवेक होना चाहिए।
प्रस्तुत पुस्तक में आचार्य प्रशांत समझाते हैं कि कुसंगति तुम्हें और ज़्यादा आश्रित करती है कुसंगति पर, तुम तड़प जाओगे कुसंगति और नहीं मिली तो। और सुसंगति तुमको धीरे-धीरे हर प्रकार की संगति से आज़ाद कर देती है, यहाँ तक कि वो तुमको अन्ततः सुसंगति से भी आज़ाद कर देती है।
यदि आप भी स्वयं को एक सार्थक और सुन्दर संगति देना चाहते हैं तो यह पुस्तक आपके लिए है।
हे, राम मुझे मुझ से बचा
फर्क नहीं पड़ता कि आप introvert है या extrovert खुद को clean chit नहीं देने का कि बाहर वालों की संगत में बिगड़ा हूं
चोर ,लालच तो भीतर ही है जो गलत चुनाव करता है और खुद को सही ठहरता है यह बोल कर कि संगति सही नहीं मिली।
BEST BOOK BY ACHARYA JI WELL EXPLAINED THIS BOOK HELPS US TO UNDERSTAND THE RIGHT AND HONEST VIEW OF COMPANY.
Raj Amrit
2mo
awesome book
Everyone should read this book at least once to understand what a true relationship is and to free themselves from societal brainwashing and superstition
Shubham Shriram Dindore
6mo
सही संगति की शक्ति को समझाने वाली गहरी और जागरूक किताब
संगति” किताब ने मुझे यह समझाया कि हम जिन लोगों, विचारों और माहौल के बीच रहते हैं, वही धीरे-धीरे हमारे जीवन को आकार देते हैं। पहले मैं संगति को सिर्फ दोस्तों या लोगों तक सीमित समझता था, लेकिन इस किताब ने बताया कि संगति हमारे विचारों, आदतों और यहां तक कि हमारी सोच के स्तर को भी प्रभावित करती है।
किताब बहुत सरल भाषा में यह स्पष्ट करती है कि गलत संगति हमें धीरे-धीरे नीचे खींचती है, जबकि सही संगति हमें...