
हे, राम मुझे मुझ से बचा फर्क नहीं पड़ता कि आप introvert है या extrovert खुद को clean chit नहीं देने का कि बाहर वालों की संगत में बिगड़ा हूं चोर ,लालच तो भीतर ही है जो गलत चुनाव करता है और खुद को सही ठहरता है यह बोल कर कि संगति सही नहीं मिली।

ध्रुव जी, यही तो लाइन है जो पूरी बात का सार है, हे राम मुझे मुझ से बचा। बाहर की संगत को दोष देना कितना आसान रास्ता है, चोर घर के भीतर बैठा है और हम गली में पहरा बिठा रहे हैं। आपने वो पहरा खुद हटाया है, यह देखना कि गलत चुनाव मेरा है, संगति सिर्फ बहाना है, यही असली ईमानदारी है। इसे कमज़ोर मत पड़ने दीजिए किसी नरमी में।