
संगति” किताब ने मुझे यह समझाया कि हम जिन लोगों, विचारों और माहौल के बीच रहते हैं, वही धीरे-धीरे हमारे जीवन को आकार देते हैं। पहले मैं संगति को सिर्फ दोस्तों या लोगों तक सीमित समझता था, लेकिन इस किताब ने बताया कि संगति हमारे विचारों, आदतों और यहां तक कि हमारी सोच के स्तर को भी प्रभावित करती है। किताब बहुत सरल भाषा में यह स्पष्ट करती है कि गलत संगति हमें धीरे-धीरे नीचे खींचती है, जबकि सही संगति हमें...