
📘 माया – आचार्य जी की पुस्तक से समझ अभी मेरे हाथ में आचार्य जी की किताब ‘माया’ है। पढ़ रही हूँ अभी। माया का मतलब: जो हमें लगता है कि सच्चा मालूम पड़ रहा पर वह या तो रहा नहीं या बदल गया — ऐसे को माया कहते हैं। इस पुस्तक में आचार्य जी समझा रहे हैं— • एक सीमित तल है माया, और हम उससे नीचे हैं। • पर उससे ऊपर जाया जा सकता है। • माया का दास होने की जगह माया का स्वामी हुआ जा सकता...
