
जो मन से न उतरे, माया काहिए सोय

इस किताब “माया” को पढ़कर मेरी माया के बारे में बनी सारी धारणाएं बदल गईं। पहले मैं माया को एक रहस्यमयी या आध्यात्मिक शक्ति मानता था, लेकिन इस किताब ने इसे बहुत ही व्यावहारिक और स्पष्ट तरीके से समझाया। लेखक बताते हैं कि माया असल में हमारी देखने की सीमित क्षमता है—हम चीजों को अधूरा देखते हैं और उसी को पूरा सच मान लेते हैं। यही बात मेरे लिए सबसे ज्यादा impactful रही। किताब पढ़ते समय ऐसा लगा कि यह केवल...

📘 माया – आचार्य जी की पुस्तक से समझ अभी मेरे हाथ में आचार्य जी की किताब ‘माया’ है। पढ़ रही हूँ अभी। माया का मतलब: जो हमें लगता है कि सच्चा मालूम पड़ रहा पर वह या तो रहा नहीं या बदल गया — ऐसे को माया कहते हैं। इस पुस्तक में आचार्य जी समझा रहे हैं— • एक सीमित तल है माया, और हम उससे नीचे हैं। • पर उससे ऊपर जाया जा सकता है। • माया का दास होने की जगह माया का स्वामी हुआ जा सकता...

ONE OF THE BEST BOOK AMONG OTHERS BOOK .THIS BOOK CLEAR US IN A EASY WAY THAT WE ARE MAYA ,MAYA IS NOT OUTWORDS . OUR ORLD OR UNIVERSE IS SIMPLE AND INNNOCENT ONLY OUR IGNORANCE,LOKEDHARAM AND OUR DEEP DESIRES MAKE US BLIND TO SEE THE REALITY.... WITH BLIND EYES WE CAN SEE THE FACTS AND REALITY .......AND MORE PLS READ AND SHARE YOUR EXPERIENCE ALSO...