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Paperback Details
HindiLanguage
224Print Length
Description
'नीम लड्डू' कोई पुस्तक मात्र नहीं है, बल्कि दवाइयों का एक पिटारा है। यह दवाई हमें 'मन की कमज़ोरियों' व 'मन के अंधकार' जैसी ख़तरनाक बीमारियों से बचाती है।
निःसंदेह ये लड्डू हमारे लिए कड़वे हैं क्योंकि हमें भोगवादी बाज़ार, मीडिया और बॉलीवुड के द्वारा परोसे जा रहे मीठे ज़हर की आदत लग गयी है।
इस ज़हर के कारण हम भीतर से भी और बाहर से भी ख़त्म हो रहे हैं। भीतर भोग की लालसा, असंवेदनशीलता, और बेचैनी समय के साथ बढ़ ही रही है, और बाहर यह जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण और वन्यजीवों की क्षति, और बढ़ती विद्वेष की भावना के रूप में परिलक्षित हो रही है।
ऐसी आपातकालीन स्थिति में कोई भी सच्चा मार्गदर्शक लोरियाँ सुनाकर या सहलाकर हमें ख़तरे से अवगत नहीं कराएगा। उसे ज़ोर देकर सच्ची और खरी-खरी बातें बोलनी पड़ेंगी, चाहे वो कड़वी ही क्यों न लगें।
आचार्य प्रशांत इस पुस्तक के माध्यम से वही काम कर रहे हैं।
ये 'नीम लड्डू' आपके लिए एक उपहार हैं, जिसमें अलग-अलग तरह के दो सौ लड्डू हैं। ये लड्डू एक बीमार मन के लिए काफ़ी असरकारक हैं।
सलाह रहेगी कि एक स्वस्थ जीवन के लिए प्रतिदिन इनका सेवन करें।
कड़वी सच्चाइयों से जीवन में स्पष्टता लाने वाली किताब , यह किताब सिखाती है कि सच्चाई भले कड़वी लगे, लेकिन वही अंदर से बदलाव लाती है।
नीम लड्डू” नाम की तरह ही यह किताब भी ऐसी सच्चाइयों से भरी है जो शुरुआत में थोड़ी कड़वी लग सकती हैं, लेकिन धीरे-धीरे गहरा असर छोड़ती हैं। इस किताब को पढ़ते हुए मुझे कई बार ऐसा लगा कि यह सीधे मेरी ही कमजोरियों और आदतों की तरफ इशारा कर रही है।
लेखक ने बहुत सरल भाषा में हमारे मन की कमियों, भ्रमों और आदतों को सामने रखा है। खास बात यह है कि यह किताब केवल समस्या नहीं बताती, बल्कि हमें खुद देखने और समझने ...
Amresh Anand
6mo
Neem Laddu is like Kabir's dohe but in prose
These small snippets may feel like sharp satire but its our day-to-day reality. Small but to the point- powerful and penetrating.
Pooja Kumari
6mo
our tendency
To know about our greed, fear, ignorance.
Akash Sahu
7mo
हर एक चैप्टर आपको बदलता जाता है,, कड़वाहट bhut है सच्चाई में परन्तु जो है सो है
दुनिया को जानने में मदद मिली, खुदको और ज्यादा समझने का मौका मिला और क्या कुछ छोड़ना है वो पता चला