
नीम लड्डू” नाम की तरह ही यह किताब भी ऐसी सच्चाइयों से भरी है जो शुरुआत में थोड़ी कड़वी लग सकती हैं, लेकिन धीरे-धीरे गहरा असर छोड़ती हैं। इस किताब को पढ़ते हुए मुझे कई बार ऐसा लगा कि यह सीधे मेरी ही कमजोरियों और आदतों की तरफ इशारा कर रही है। लेखक ने बहुत सरल भाषा में हमारे मन की कमियों, भ्रमों और आदतों को सामने रखा है। खास बात यह है कि यह किताब केवल समस्या नहीं बताती, बल्कि हमें खुद देखने और समझने ...