
भक्ति, शक्ति और बोध का संगम

आचार्य जी की नई किताब बोध त्रिवेणी कल सुबह आ गई है मेरे पास। पढ़ना शुरू की हूँ अभी। यह छोटी सी बुक है। इसमें हनुमान चालीसा / दुर्गासप्तशती / राम ब्रह्म परमार्थ रूपा — तीन का संकलन है। हनुमान चालीसा में आचार्य जी इसका वेदान्तिक अर्थ बतलाए हैं — हनुमान: ज्ञान जो तीनों लोकों को प्रकाशित करे, ज्ञान जो रामकाज करवाए। हनुमान चालीसा आपके आंतरिक अज्ञान को काटने के लिए है, आपको बंधनों से मुक्त करने के लिए...

🥰 आज मेने ' Real Gold ' खरीदा है। आचार्य जी : सुनने वाला बदलता है, कहने वाला एक ही रहता है। 'अर्जुन, कोई समय नहीं था जब तुम नहीं थे या मैं नहीं था। ये गीता मैंने न जाने पहले भी कितनी बार कही है, और तुम्हीं से कही है।' सत्य तो एक ही होता है न? जब भी सत्य बोला गया है, वो एक ही बात है जो बोली गई है। बस चूँकि सुनने वाले अलग-अलग होते हैं और अपनी सीमाओं में बँधे होते हैं, इसलिए उनसे अलग-अलग तरीकों से,...