
आचार्य जी की नई किताब बोध त्रिवेणी कल सुबह आ गई है मेरे पास। पढ़ना शुरू की हूँ अभी। यह छोटी सी बुक है। इसमें हनुमान चालीसा / दुर्गासप्तशती / राम ब्रह्म परमार्थ रूपा — तीन का संकलन है। हनुमान चालीसा में आचार्य जी इसका वेदान्तिक अर्थ बतलाए हैं — हनुमान: ज्ञान जो तीनों लोकों को प्रकाशित करे, ज्ञान जो रामकाज करवाए। हनुमान चालीसा आपके आंतरिक अज्ञान को काटने के लिए है, आपको बंधनों से मुक्त करने के लिए...

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