
जलवे अहंकार के

झुन्नूलाल” एक बहुत ही सरल लेकिन गहरी कहानी के जरिए यह दिखाती है कि हम अपने ही बनाए हुए भ्रमों में कैसे जीते रहते हैं। शुरुआत में यह एक हल्की-फुल्की कहानी लगती है, लेकिन जैसे-जैसे आगे बढ़ते हैं, समझ आता है कि यह हमारे अपने जीवन की ही कहानी है। इस किताब ने मुझे यह समझने में मदद की कि जो डर, असुरक्षा और बेचैनी हम महसूस करते हैं, उनका कारण बाहरी दुनिया नहीं बल्कि हमारा अपना मन है। हम जिन चीज़ों को सच ...

प्रशांत युग का सबसे रोचक पात्र, जो सत्य से ज़्यादा सुविधा चुनता है। हम सबके भीतर छुपा हुआ jhunnulal. Not a man, but a mindset the Prashant Era dares to reveal. “Jhunnulal helps me catch my own excuses before they start sounding like wisdom.”☺️🕊️