
झुन्नूलाल” एक बहुत ही सरल लेकिन गहरी कहानी के जरिए यह दिखाती है कि हम अपने ही बनाए हुए भ्रमों में कैसे जीते रहते हैं। शुरुआत में यह एक हल्की-फुल्की कहानी लगती है, लेकिन जैसे-जैसे आगे बढ़ते हैं, समझ आता है कि यह हमारे अपने जीवन की ही कहानी है। इस किताब ने मुझे यह समझने में मदद की कि जो डर, असुरक्षा और बेचैनी हम महसूस करते हैं, उनका कारण बाहरी दुनिया नहीं बल्कि हमारा अपना मन है। हम जिन चीज़ों को सच ...

प्रशांत युग का सबसे रोचक पात्र, जो सत्य से ज़्यादा सुविधा चुनता है। हम सबके भीतर छुपा हुआ jhunnulal. Not a man, but a mindset the Prashant Era dares to reveal. “Jhunnulal helps me catch my own excuses before they start sounding like wisdom.”☺️🕊️

हमारी जिंदगी एक मज़ाक है, वास्तव में इसे गंभीरता से लेने की कोई जरुरत नहीं, इसे सहजता से जीना ही सच्चा और उत्कृष्ट जीवन है। परन्तु हम ऐसे लोग कहाँ? हम तो गंभीर, चिंतक और so called 😮 समझदार लोग हैं, फिर हमारी ही भाषा में यह प्यारी सी किताब हमसे बात करती है😄। चलिए छोड़िये इतना बता देता हूँ, मजा आएगा पढ़के, खुद का असली चेहरा देखकर😋।खुद की खोज - आत्मज्ञान : एक व्यंग्यपूर्ण ढंग से। अब क्या comments ही...

उदाहरण व कहानियाँ हर सूत्र और सीख को और पैनी कर देती है। आचार्य जी ने कहानियों के माध्यम से कई जलवे बताएं है झुन्नू के। झुन्नू, धनिया, पुदीना, गदहवा इन्हीं सब नामों से अहंकार का नामकरण हुआ है।😅 यदि जानना है कि कौन है झुन्नू और धनियाँ, तो यह पुस्तक पढ़नी होगी। सीख👇 => प्रकृति में जीना माने मृत्यु में जीना।♾️ => जगत जब आपको तोड़ता भी है तो कभी मुक्त नहीं करता। वह आपको तोड़कर भी जगत के भी...