
अध्याय 5-18, प्रमुख श्लोकों पर आधारित भाष्य

गीता भाष्य – भाग 2” पढ़ते हुए मुझे गीता के गहरे अर्थों को और स्पष्ट रूप से समझने का अवसर मिला। यह भाग पहले भाग की तुलना में और अधिक गहराई में जाकर कर्म, ज्ञान और जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझाता है। किताब में श्लोकों की व्याख्या बहुत ही सरल और व्यावहारिक तरीके से की गई है, जिससे यह समझना आसान हो जाता है कि गीता का ज्ञान केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि जीने के लिए है। मुझे खास तौर पर यह बात बहुत प...

Chapter : 6 तुम 'मैं' पर पहुँचे और पता चला कि परेशानी भीतर बैठी है। अब उसको हटाना है। पर अगर आप भीतर पहुँचे हैं और इतनी योग्यता आपने दिखाई है, इतनी यात्रा आपने पूरी की है, तो आपको ये अनुभव भी हो ही गया होगा कि ये जो मन है, उसमें जो 'मैं' है, वो भीतरी है ही नहीं, वो तो बाहर से आ रहा है लगातार। तो अब हमने कहा कि फिर सही कर्म ये हुआ कि बाहर से जिन श्रोतों से भीलर ये प्रदूषण और प्रभाव पहुँचते हैं, ...