
Chapter : 6 तुम 'मैं' पर पहुँचे और पता चला कि परेशानी भीतर बैठी है। अब उसको हटाना है। पर अगर आप भीतर पहुँचे हैं और इतनी योग्यता आपने दिखाई है, इतनी यात्रा आपने पूरी की है, तो आपको ये अनुभव भी हो ही गया होगा कि ये जो मन है, उसमें जो 'मैं' है, वो भीतरी है ही नहीं, वो तो बाहर से आ रहा है लगातार। तो अब हमने कहा कि फिर सही कर्म ये हुआ कि बाहर से जिन श्रोतों से भीलर ये प्रदूषण और प्रभाव पहुँचते हैं, ...