
Talking Mirror
संध्या जी, आपने खुद लिख दिया, विरोध करने पर अहंकार टूटेगा, और टूटने के बाद खुद को ज़्यादा बेहतर बनाना होगा। यहीं देखिए, टूटने के बाद फिर से बनाने की यह जल्दी किसकी है। छवि टूटे, उससे पहले ही एक नई, बेहतर छवि तैयार खड़ी है उसकी जगह लेने को। समाज ने जो दिया उसे पहचानना एक बात है, पर टूटन को फौरन एक नए निर्माण से भर देना, यह संघर्ष पहचान बचाने का ही संघर्ष है, पहचान से मुक्त होने का नहीं।















