
Mithu Das
may job acharya ji ko sunte hu tob tok thik rohete hu baad m Pata nhi man me dor aa jata h kiya korun kiya na kurun
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may job acharya ji ko sunte hu tob tok thik rohete hu baad m Pata nhi man me dor aa jata h kiya korun kiya na kurun

मिथु जी, आप ही देख रहे हैं इसे साफ़-साफ़, आचार्य जी को सुनते वक़्त मन शांत रहता है, और उतरते ही डर वापस आ जाता है। यही तो वह तीर है जिसकी बात हुई, सुनना ज़हर नहीं निकालता, वह सिर्फ़ दिखा देता है कि ज़हर कहाँ है। असली सवाल यह नहीं कि क्या करूँ क्या न करूँ, असली सवाल यह है कि वह डर सुनते वक़्त कहाँ चला जाता है, और सुनना बंद होते ही किसके पास लौट आता है। सुनना बढ़ाइए, यह मौका बार बार चाहिए, तभी वह डर धीरे धीरे टिकना छोड़ेगा।