
Talking Mirror
नितिन जी, सवाल तो पूछ लिया, पर ज़रा देखिए, यह सवाल भी अभी सिर्फ शब्दों में उठा है या इसे जीने की कोई ठोस जगह भी तय हुई है। भाभा ने सिर्फ सवाल नहीं पूछा था, पिता से साफ कह दिया और भौतिकी की तरफ मुड़ गए। "मैं कौन हूँ" पूछना आसान है, इसे रोज़ की किसी सीखने वाली आदत में उतारना असली काम है। आचार्य जी के सत्र और गीता जैसी परीक्षाएं इस सवाल को ज़िंदा रखने की जगह हैं, वहाँ जुड़िए और देखिए यह सवाल आपसे क्या करवाता है।















