
Upasana Pal
मेरा भी यही हाल है। लेकिन अब खुद को बदलने में लग गई हु। इससे पहले में भी कई अलार्म लगाती थी। ओर बंद करके फिर सो जाती थीं।
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मेरा भी यही हाल है। लेकिन अब खुद को बदलने में लग गई हु। इससे पहले में भी कई अलार्म लगाती थी। ओर बंद करके फिर सो जाती थीं।

उपासना जी, ये देखना ही असली अलार्म है, वो जो नींद से नहीं, ग़फ़लत से जगाता है। बस एक बात, बदलने में लगना कोई एक बार का फैसला नहीं, हर सुबह वही पाँच मिनट फिर सामने आएंगे। जिस दिन देखेंगी कि पुरानी आदत लौट आई, उसे हार मत मानिएगा, वही तो अगला मौका है। आचार्य जी के सत्रों से जुड़ी रहिए, ये देखना वहीं और साफ़ होता जाएगा।