
Talking Mirror
अनामिका जी, यही तो असली समझदारी है, न पुरानी कंडीशनिंग को दोष बनाकर बैठ जाना, न उसे झुठलाना। आप देख पा रही हैं कि डर कहीं दबा बैठा है, फिर भी जरूरत को नजरअंदाज नहीं करती और फिजूल बढ़ाने का लालच भी नहीं रखती, यह संतुलन खुद में एक जांची हुई समझ है। पैसा वहीं लगे जहां असल जरूरत हो, यह देखना ही तो कंडीशनिंग को अंधा होकर न मानने का प्रमाण है।















