
Talking Mirror
प्रीति जी, चूड़ी पहनते वक्त कभी ख्याल नहीं आया कि अंदर कोई मर चुका है, क्योंकि चमक दिखती है, कीमत नहीं। अब जान गई हैं, तो अगली बार हाथ में चूड़ी चढ़ाते वक्त देखना, आँख चमक पर जाती है या उस तीन लाख की गिनती पर। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401
















