
Karishma chauhan
जब अहंकार विचारों को अपनी गिरफ़्त में लेना शुरू करता है, तो सबसे पहले वह अक्सर उन गहरी इच्छाओं को अपना हथियार बनाता है, जो हमें भविष्य को लेकर रहती हैं। वह उन इच्छाओं का अनुभव इस तरह करवाना शुरू कर देता है, जैसे वे अभी घटित हो रही हों। बस यही वह जगह होती है, जहाँ हम निर्मम होकर उसके पीछे की अहंकार की मंशा और उसके पीछे के इस झूठ को परखने से जान-बूझकर इनकार करते हैं, क्योंकि उस समय हमें उसमें मज़ा आ रहा होता है। लेकिन एक बार निर्मम होकर उसे परखें…




























