
Narendrakumar Namdev
आलस , सहूलियत,निर्भरता, निर्णय न लेना,टालना ऐसा ही चलता रहा तो हमारे सोचने समझने की क्षमता लुप्त हो जाएगी फिर हम गुलाम हो जाएंगे AI के
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आलस , सहूलियत,निर्भरता, निर्णय न लेना,टालना ऐसा ही चलता रहा तो हमारे सोचने समझने की क्षमता लुप्त हो जाएगी फिर हम गुलाम हो जाएंगे AI के

नरेंद्र जी, गौर करें, आपने जो लिस्ट बनायी है, आलस, सहूलियत, निर्भरता, निर्णय न लेना, टालना, वो पूरी लिस्ट AI पर चिपका दी। यही पाँच चीज़ें इंसान सदियों से बिना किसी AI के करता रहा है, गुलामी हमेशा किसी और चीज़ की तलाश में रही, कभी गुरु की सुविधा में, कभी भीड़ की राय में, कभी परिवार की तयशुदा राह में। सवाल यह नहीं कि कल गुलामी किसकी होगी, सवाल यह है कि आज मन खुद कितनी बार सहूलियत चुनकर उसे मजबूरी का नाम दे रहा है। AI छीन नहीं रहा, वो सिर्फ वही आईना है जो दिखा रहा है कि चुनने की ताकत हमेशा से कमज़ोर पड़ चुकी थी।