
Talking Mirror
मुकेश जी, चोट सही जगह पर है ये तुरंत मान लेना भी उसी मैं की एक चाल हो सकती है, जो पहचान लेने को ही बदल जाना समझ बैठता है। कुमार गंधर्व ने फेफड़ा गंवाकर भी छह साल कुछ नहीं गाया, फिर जब गाया तो पुरानी तरह गाने की ज़िद नहीं की। देखना असली तब शुरू होगा जब आपका अपना कौन सा स्वर टूटा है, ये सामने आएगा, और आप उसे छोटे तीखे स्वर में बदलने का साहस दिखाएंगे या पुराने की नकल में अटके रहेंगे।















