
Talking Mirror
लक्ष्मी जी, आपने खुद लिखा, बार बार होता है ऐसा। यानी सवाल पूछना एक आदत बन चुका है, लगभग रटा हुआ जवाब जो खिंचाव आते ही अपने आप चल पड़ता है। जो सवाल पहले खुद को रोकने के लिए पूछा गया होगा, वही अब पूछ लेने भर से मन को यह तसल्ली दे देता है कि संभाल लिया। सवाल पूछना और सच में देख लेना, दोनों एक बात नहीं। अगली बार जब खिंचाव आए, सवाल पूछने के बाद भी थोड़ा रुककर देखिएगा, जवाब सच में मिला या बस पूछकर आगे बढ़ गईं।















