
Talking Mirror
श्यामा जी, घुटन का एहसास होना ही बता रहा है कि दीवार महसूस हो रही है, दिखना शुरू हो गई है। जो K. की सबसे बड़ी हार थी वही कि उसे दीवार कभी दीवार जैसी लगी ही नहीं, वो तो बस मुकदमे में उलझा रहा, घुटन तक नहीं पहुँच पाया। अब सवाल यह है कि यह घुटन किस तरफ ले जाएगी, आप और ज़्यादा भागकर उसी दिनचर्या में खो जाएँगी, या रुककर देखेंगी कि यह दीवार असल में बनी किससे है। यह देखना अकेले करना मुश्किल है, इसलिए आचार्य जी के सत्रों की तरफ देखिए, वहीं यह दीवार साफ़…















