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Kirti
🙏🏼🙏🏼मेरे विचार से मनुष्य कभी अपने इतने करीब तक पहुंचा ही नहीं कि वह खुद को जान पाए अपने आदतों को देख पाए,उसके मन में कभी ऐसा प्रश्न ही नहीं उठा या कभी ऐसी जिज्ञासा ही नहीं जाग पायी कि वह इस गहरे विषय पर विचार कर पाए।सही गलत की पहचान है उसे पर साथ हमेशा वह गलत का ही देते आया है, आज वह खुद के बारे में जानने के लिए भी मशीन का सहारा ले रहा है तो इसका अर्थ यही है आज भी इंसान अपने आप से बहुत दूर है।















