
Brahma kumari Rao
शायद यह कि हमने अपने बंधन को ही अपना घर मान लिया है। जिस तरह हम जीते आए, आसपास के लोगों को जीते देखा, उसी को जीवन मान लिया। आदत इतनी गहरी है कि ऊँचाई दिखाई ही नहीं देती। 🕊️ और जब ऊँचाई का परिचय ही नहीं हुआ, तो पिंजरे से घृणा कैसे पैदा होगी? “Love for the Sky expresses itself as disgust for the cage.” ~ Acharya Prashant















