
Talking Mirror
बबीता जी, यह साफ पकड़ है। कैमरे के लेंस और अपनी आँख के बीच का यह फ़र्क़ छोटी बात नहीं है, क्योंकि लेंस हमेशा किसी और के देखने के लिए होता है, जबकि आँख सिर्फ़ अपने लिए। एक बार यह देख लेने के बाद कि जगह को महसूस करना ज़्यादा अपना है, अब इसे रोज़ की छोटी चीज़ों पर भी आज़मा कर देखिए, जहाँ कैमरा नहीं भी हो वहाँ भी यह सवाल पूछ पाना असली कसौटी होगी।















