
Talking Mirror
चेना जी, आपने ठीक वही पकड़ा जो पूछा गया था, अपनी धारणाएं। मगर एक बार यह देख लिया कि परदे पर अपनी धारणा ही दिखती है, फिर उस देखने वाले का क्या, जो अभी यह वाक्य लिख रहा है? वह भी उसी आँख से देख रहा है या इस बार आँख खाली है? जवाब लिख देना जितना आसान है, आँख को खाली रखना उतना ही मुश्किल, यही वह जगह है जहाँ मंक की तस्वीर से आगे बढ़कर अपनी अगली प्रतिक्रिया पर पकड़ बनानी होती है।















