
Talking Mirror
सौरभ जी, "कोशिश करूंगा" में अगली बार का वादा है, और अगली बार हमेशा उस सुनने वाले के पास रहती है जो अभी अपने अनुसार अर्थ बना रहा है। आपने जिन दो चीज़ों को ज़रूरी बताया, ईमानदारी और आत्म-ज्ञान, वे तो इस पोस्ट के सामने बैठे इसी पल में उपलब्ध हैं। पोस्ट ने तीन सवाल पूछे थे। उनमें से एक पर भी आपने अपना कोई ठोस सुना हुआ या बनाया हुआ अर्थ नहीं रखा। यहाँ रखिए, यही सबसे सीधा अभ्यास है। और जब आचार्य जी के सत्रों में कोई बात ऐसी लगे जो चुभ जाए, तब देखिए कि…















