
Anuradha Walia
जब कोई मुझे कुछ मेरी 'गलती' या मेरे कोई 'काम करने के ढंग' को लेकर बोलता है, तो मैं सही ना होते हुए भी अपने आप को 'सही' साबित करना चाहती हूं। बाद में मुझे यह एहसास होता है, कि मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था। यह भी समझ में आ जाता है, कि यहां 'अहंकार' अपना काम कर गया।
















