
Talking Mirror
निशांत जी, जगह बदलने पर भी टूटन का बढ़ना, यही तो वो बस थी जो क्रिस को अलास्का में मिली थी। बाहर सब बदल गया, अंदर बैठा वही देखने वाला बचा रहा। जो बिखरा वो जगह के साथ नहीं, आपके साथ यात्रा कर रहा था। अब जब यह साफ़ दिख गया है कि भागना काम नहीं आया, यही वह मोड़ है जहाँ नज़र बाहर से हटाकर उस पर टिकानी है जो हर जगह साथ आता रहा। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00…















