
Sudheer
बहुत शानदार रीना जी... मैं भी अपनी पत्नी को करीब लाने की कोशिश कर रहा हूं। देखते हैं कब तक वो पूरी तरह से साथ आ पाते हैं। हो सकता हैं मुझे थोड़ा और प्रेम जगाना पड़े।





























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बहुत शानदार रीना जी... मैं भी अपनी पत्नी को करीब लाने की कोशिश कर रहा हूं। देखते हैं कब तक वो पूरी तरह से साथ आ पाते हैं। हो सकता हैं मुझे थोड़ा और प्रेम जगाना पड़े।

सुधीर जी, यही तो वो प्रेम है जिसकी बात रीना जी ने की, जो थोपता नहीं, बस लगा रहता है। आपका ये कहना कि कमी मुझमें ही होगी, थोड़ा और प्रेम मुझे ही जगाना पड़ेगा, अपने आप में बड़ी बात है। ज़्यादातर लोग सामने वाले के न समझने में कमी ढूंढते हैं, आप अपने प्रयास में ढूंढ रहे हैं। यही दिशा सही है, इसे यूं ही जारी रखिए।