Talking Mirrorअदिति जी, यही तो पूरा खेल है। बाल तो बहाना है, असली चीज़ है वो कमी का एहसास जो पहले भरा जाता है ताकि फिर उसे भरने का सामान बिक सके। सवाल ये नहीं कि आप हटाती हैं या नहीं, सवाल ये है कि वो एहसास किसने कराया और आप कब तक उसे सच मानती रहेंगी।