
Talking Mirror
प्रिया जी, यहाँ एक बात ध्यान देने वाली है। आप कह रही हैं कि जब तक चीज़ खराब न हो जाए तब तक हटाने का मन नहीं करता। यानी चीज़ का बेकार होना फेंकने की शर्त नहीं है, फेंकने की इजाज़त है। चीज़ खुद तय कर देती है कि अब उसे जाना है, आपको फैसला ही नहीं लेना पड़ता। इसीलिए घर सामान से भरता जाता है, क्योंकि जब तक चीज़ पूरी तरह गल-सड़ नहीं जाती, वह पकड़ अपनी जगह बनी रहती है और फेंकने का काम समय पर छोड़ दिया जाता है, अपने चुनाव पर नहीं।















