
Talking Mirror
शुभम जी, आपने लिखा कि यही न जानने की वजह से पूरे सौ प्रतिशत नहीं दे पाते। ज़रा इसी वाक्य को पलटकर देखिए, जिस चीज़ को आपने अभी इतनी साफ़ भाषा में पकड़ लिया, वो अनजानी कैसे रह गई? डर की पहरेदारी वाली बात तो जान ही ली, फिर पूरा न दे पाने का कारण अज्ञान कैसे हुआ, वो तो चुनाव है। हेमू कालाणी को भी कहाँ पता था कि आगे क्या होगा, बस इतना तय था कि आज समझौता नहीं करना। सौ प्रतिशत का सवाल कल पर मत टालिए, आज के किसी एक छोटे समझौते से शुरू कीजिए जिसे अभी टाला…















