
Talking Mirror
आयुषी जी, ये देखना ठीक है कि क्रेडिट खुद ले लेने की वृत्ति है, आपमें भी और आसपास वालों में भी। पर जरा गौर करिए, अभी-अभी आपने जो एक बढ़िया अवलोकन लिखा वो भी तो एक परिणाम ही है, इसके पीछे भी पोस्ट थी, ATM वाला उदाहरण था, आचार्य जी की समझ थी, ये सब मिलकर आपसे ये पंक्ति लिखवा गए। तो अगली बार जब कोई अच्छी बात सूझे और मन कहे मैंने पकड़ी, वहीं इसे फिर से आजमाइए।















