
BABITA KUMARI
Right, HIDP में जाने से यही लगा कि हम एक दूसरे से पहले मिल चुके हैं। एक अलग ही अपनापन जैसा लगा। जो शायद अपनो के बीच रहकर भी नहीं लगता है। ये सब हमारे चेतना के तल के रिश्ते हैं। जो इसे संसारी दुनिया में बहुत कम ही लोग समझते हैं।
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