
Purvi Nagar
अद्वैत वेदांत के अनुसार दूसरा कोई नहीं है अगर हम इस आधार पर देखें तो हमारे द्वारा किया जाने वाला हर एक काम प्रकृति को प्रभावित कर रहा है हमारी बेचैनी हमें और स्थिर करती है और वह स्थिरता धीरे-धीरे बढ़कर प्रकृति की अस्थिरता हो गई है, जो इस पिंड में है वही इस ब्रह्मांड में है हमारी बेचैनी हमें और ज्यादा लालची बनती है यह इधर उधर भागती है और ज्यादा उपभोग करवाती है और जब भोग बढ़ता है तो दूसरी आपदाएं भी बढ़ती है जिस प्रकार से समुद्र की एक लहर ही दूसरी…















